Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 111, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
सर्वं सर्वगतं शान्तं ब्रह्म संपद्यते तदा ।
असंकल्पनशस्त्रेण च्छिन्नं चित्तं गतं यदा ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीराम, जब संकल्प
परित्यागरूप तीक्ष्ण शस्त्र से मूल के साथ चित्त का उच्छेद हो गया, तभी पुरुष सर्वस्वरूपः
सर्वव्यापी शान्त ब्रह्म हो जाता है