Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 111, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
स्वसंवेदनसाध्येऽस्मिन्संकल्पानर्थशासने ।
शान्तायामत्र वपुषि पुंसः कैव कदर्थना ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने संवेदन द्वारा इस संकल्परूप अनर्थ का निग्रह
होने पर तदनन्तर शान्ति आदि साधनों से सम्पन्न जीवन्मुक्ति होने पर अधिकारी पुरुष के
शरीर में कौन क्लेश हे ? अर्थात् कुछ नहीं है