Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 111, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अपि स्ववेदनाक्रान्तौ न शक्ता ये नराधमाः ।
कथं व्यवहरिष्यन्ति व्यवहारदशासु ते ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जो नराधम अपने मन के निग्रह में भी
समर्थ नहीं हैं, वे व्यवहारावस्थाओं में कैसे व्यवहार करेंगे ?