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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 112, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 112 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

अविद्यया वासनया तयान्तश्चित्तसत्तया । विलीनया त्यागवशात्परं श्रेयोऽधिगम्यते ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

अविद्या ओर वासनारूप उस चित्तसत्ता के बाह्य विषयों के अनुसन्धान त्याग के विलीन होने पर निरतिशय सुख प्राप्त होता हे