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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 112, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 112 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

तस्य चञ्चलता यैषा त्वविद्या राम सोच्यते । वासनापदनाम्नीं तां विचारेण विनाशय ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, मन की जो चंचलता है, वह अविद्या नाम से कही जाती हे । वासनापद नामक उस अविद्या का विचार से विनाश करो