Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 112, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 112 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
जाड्यानुसंधानहतं जाड्यात्मकतयेद्धया ।
चेतो जडत्वमायाति दृढाभ्यासवशेन हि ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जडता के अनुसन्धान से
बिगड़ा हुआ चित्त बद्धमूल हुई जाङ्यात्मकता से दृढाभ्यासवश जडता को प्राप्त होता है