Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 112, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 112 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विवेकैकानुसंधानाच्चिदंशात्मतया मनः ।
चिदेकतामुपायाति दृढाभ्यासवशादिह ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
विवेक के अनुसन्धान से बद्धमूल हुई चिदंशात्मता से मन दृढ़ाभ्यासवश चिन्मात्रता को प्राप्त
होता हे