Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 112, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 112 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
पौरुषेण प्रयत्नेन यस्मिन्नेव पदे मनः ।
पात्यते तत्पदं प्राप्य भवत्यभ्यासतो हि तत् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
पौरुष प्रयत्न से, चाहे वह शास्त्रीय हो, चाहे स्वाभाविक, जिसी पद में मन
लगाया जाता है, उस पद को प्राप्तकर अभ्यासवश तद्रूप हो जाता है