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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 112, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 112 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

जायते म्रियते चैषा मनसस्तीव्रवेगिता । सौम्याम्बुबुद्बुदालीव निर्निमित्ता स्वभावतः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हे सौम्य, जल के बुदबुदे के समान यह मन का तीव्र वेग उपेक्षा करने से स्वभावतः उत्पन्न होता है और रोकने के प्रयत्न से शान्त होता है, क्योकि उसकी उत्पत्ति में कोई निमित्त नहीं हे