Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 112, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 112 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
शीतता तुहिनस्येव कज्जलस्येव कृष्णता ।
लोलता मनसो रूपं तीव्रातीव्रैकरूपिणी ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
“स्वभावतः ऐसा जो कहा है, उसका उपपादन करते है ।
जैसे बर्फ का शीतलता रूप है ओर काजल का कालिमा रूप है वैसे ही एकमात्र तीव्र
रूपिणी तीव्र चंचलता मन का रूप है