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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 113, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

क्वचिद्वक्राः क्वचित्स्पष्टा दीर्घाः खर्वाः स्थिराश्चलाः । यत्प्रसादोद्भवास्तस्माद्व्यतिरेकमुपागताः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रस्तुत चक्रिका के प्रसाद से उत्पन्न हुए सब पदार्थ कहीं पर टेढ़े है, कहीं पर साफ हैं, कहीं पर लम्बे, कहीं पर बौने, कहीं पर स्थायी ओर कहीं पर चंचल है, इसलिए परस्पर भेद को प्राप्त हुए हैं