Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 113, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
अनन्तदुःखाकुलया सदैव मृतयानया ।
संबोधहीनया यत्र चित्रमन्धीकृतं जगत् ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
सदा अनन्त दुःखों से आकुल मृत के तुल्य अतः संज्ञाहीन
इसने इस जगत् को अन्धा बना रक्खा हे