Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 66
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 113, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
न यस्याश्चेतनैवास्ति याप्यनष्टैव नश्यति ।
तया स्त्रिया परुषया चित्रमन्धीकृतः पुमान् ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
न जिसमें चेतना ही है और जो नष्ट
न होने पर भी नाश को प्राप्त होती है, उस कर्कश स्त्रीरूपी अविद्या से पुरुष अन्धा किया गया
है, यह बड़े आश्चर्य का विषय है