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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

एकस्मिन्वितते शान्ते या न किंचन विद्यते । संकल्पमात्रेण गता सा सिद्धिं परमात्मनि ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

अद्वितीय सर्वव्यापक शान्त आत्मा में यह सृष्टि कुछ भी नहीं है । यह परमात्मा में केवल संकल्प से उत्पन्न हुई है