Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अतः संकल्पसिद्धेयं संकल्पेनैव नश्यति ।
येनैव जाता तेनैव वह्निज्वालेव वायुना ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि यह संकल्प से उत्पन्न हुई है, अत: जैसे अग्नि की ज्वाला जिससे
उत्पन्न हुई उसी वायु से शान्त होती है, वैसे ही संकल्प से ही इसका विनाश होता है