Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
यदुदेति परो मोहो जरामरणकारणम् ।
आशापाशशतोल्लासिवासना तद्विजृम्भते ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मतत्त्व का अज्ञान
ही जरा, मरण आदि का कारण है । जो जो वस्तु कार्य -रूप से उदित होती है, वह सब सैंकड़ों
आशारूपी जालो से वासना ही विस्तार को प्राप्त होती है, वह वास्तविक नहीं हे