Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
परं पौरुषमाश्रित्य यत्नात्परमया धिया ।
भोगाशाभावनां चित्तात्समूलामलमुद्धरेत् ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
परम पौरुष का अवलम्बन कर प्रयत्न के साथ उत्तम बुद्धि से विषयभोग
की आशा की भावना को समूल चित्त से उखाड़ कर फक दीजिये