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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 50

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

मननीयमतो नान्यत्कदा कस्य कथं कुतः । निर्विकारमनाद्यन्तमास्यतामपयन्त्रणम् ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्म से अतिरिक्त कहीं पर कोई किसी प्रकार का किसी कारण के लिए मननीय दुसरा नहीं हे, अतः निर्विकार आदि-अन्तरहित पूर्णरूप से स्थित होइए