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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

यदादावेव नास्तीदं तदद्यापि न विद्यते । यदिदं भाति तद्ब्रह्म शान्तमेकमनिन्दितम् ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त अहंभावनारूप प्रयत्न कैसे करना चाहिये, उसीको दशति हैं। जो यह पहले भी नहीं था, वह आज भी नहीं है । जो यह भासित होता है, वह शान्त, अद्वितीय, निर्विकार, निर्दोष ब्रह्म है