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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

दृष्टे सर्वगते बोधे स्वयमेव विलीयते । सर्वाशाभ्युदितेच्छाया द्वादशार्कगणे यथा ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सभी दिशाओं में बारह सूर्यों कु एक साथ उदित होने पर छाया अपने आप विनष्ट हो जाती है वैसे ही सर्वव्यापक ज्ञानस्वरूप परब्रह्म परमात्मा का साक्षात्कार होने पर यह अविद्या अपने-आप नष्ट हो जाती है