Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
अनया वेधितं चेतो विसतन्तावपि क्षणात् ।
पश्यत्यखिलसंसारसागरानर्थविभ्रमम् ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस अविद्या से वेधित चित्त कमलनाल के अत्यन्त
सूक्ष्म तन्तु में भी एक क्षण में समस्त संसार-सागररूपी अनर्थकारी भ्रम देखता है