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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 74

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 74 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 74

संस्कृत श्लोक

अनयोपहते चित्ते राज्य एव हि संस्थिताः । तास्तादृश्यो जना यान्ति या न योग्याः श्वपाकिनः ॥ ७४ ॥

हिन्दी अर्थ

इससे चित्त के अभिभूत होने पर राज्य में ही स्थित पुरुष उन-उन यातनाओं को प्राप्त होते हैं, जो चाण्डालो के भी योग्य नहीं हैं