Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 115, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 115, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 115 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
यथा गृहपतिर्गेहे विविधं हि विचेष्टते ।
न गृहं तु जडं राम तथा देहे हि जीवकः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे घर में घर का मालिक अनेक प्रकार की
क्रियाँ करता है, किन्तु घर कुछ भी नहीं करता, वैसे ही देह में जीव विविध चेष्टाएँ करता
है, जड देह कुछ नहीं करता