Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 115, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 115, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 115 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
सर्वेषु सुखदुःखेषु सर्वासु कलनासु च ।
मनः कर्तृ मनो भोक्तृ मानसं विद्धि मानवम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
सब सुखदुःखं में और सब कल्पनाओं मेँ मन ही कर्ता
है ओर मन ही भोक्ता हे । मन को आप जीव जानिये