Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 116, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 116 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । राजसूयफलं प्राप्तं लवणेन किल प्रभो । प्रमाणं किमिवात्र स्यात्कल्पनाजालशम्बरे ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

मानसिक राजसूययज्ञ का फल है, इसे लवण राजा जान नहीं सकता