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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 116, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 116 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

तेन पुरुषेण जातमात्रेणैव बाल्यात्प्रभृति विद्याग्रहणं कर्तव्यं गुरवोऽनुगन्तव्याः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

उस पुरुष को पैदा होते ही बचपन से लेकर विद्याध्ययन करना चाहिये ओर तत्वज्ञानी गुरु का अनुगमन करना चाहिये