Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 116, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 116 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
जायते तस्मात्ततः पुरुषः संपद्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उससे जीव
उत्पन्न होता है । जन्म के अनन्तर कदाचित् पुण्य की अधिकता से वह कर्म ओर ज्ञान का
अधिकारी पुरुष होता है