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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 117, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 117, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 117 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

यत्स्वरूपपरिभ्रंशाच्चेत्यार्थे चितिमज्जनम् । एतस्मादपरो मोहो न भूतो न भविष्यति ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जो स्वरुप से भ्रष्ट होने के कारण चेत्य अर्थ में (विषय में) चिति का मग्न होना है, इससे बढ़कर मोह न तो कोई हुआ और न होगा