Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 118, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 118 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

अवबोधं विदुर्ज्ञानं तदिदं सप्तभूमिकम् । मुक्तिस्तु ज्ञेयमित्युक्तं भूमिकासप्तकात्परम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्ञेय क्या है अथवा ज्ञान क्या है ? जिसकी भूमिकाओं का आप वर्णन करते हैं, ऐसी जिज्ञासा होने पर उसका लक्षण कहते हैं। अखण्डाकार चित्तवृत्ति में आरूढ ब्रह्म अज्ञान का निवर्तक होने से ज्ञान कहा जाता है, उक्त ज्ञान सात भूमिकावाला है। अज्ञान की निवृत्ति होने पर उसी ब्रह्म का औपचारिक नाम ज्ञेय या मुक्ति है, इस प्रकार उपचार से एक ही ब्रह्म दो प्रकार का कहलाता है । ज्ञेय या मुक्ति नाम की स्वस्थ अवस्था तो सात भूमिकाओं के अनन्तर प्रतिष्ठित है