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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 119, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । ऊर्मिकासंविदुदयः कथं हेम्नो यथा मुने । अहंता चात्मन इति यथावद्ब्रूहि मे प्रभो ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुनिजी, सुवर्ण में अँगूठी की भ्रान्ति का उदय कैसे होता है और आत्मा में अहन्ता कैसे होती है ? दृष्टान्त ओर दार्ष्टान्तिक इन दोनों को आप युक्ति द्वारा स्पष्टरूप से कहने की कृपा कीजिये