Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 119, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
सत एवागमापायौ प्रष्टव्यौ नासतः सता ।
अहंत्वमूर्मिकात्वं च सती तु न कदाचन ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, सत् के उत्पत्ति ओर विनाश स्वतःसिद्ध द्रष्टा
द्वारा देखे जा सकतें है असत् के उत्पत्ति ओर विनाश कदापि नहीं, इसलिए सत् के ही
उत्पत्ति ओर विनाश को आपको पूछने चाहिये