Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 119, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
महार्णवाम्भसीवाम्बु संस्थिता परमेश्वरे ।
जलं द्रवत्वात्स्पन्दीव निस्पन्दं परमं पदम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
महार्णव के जल में जल के तुल्य
परमेश्वर में यह सृष्टि स्थित है । भेद इतना ही है कि जल द्रव होने से चलनशील-सा है और
ब्रह्म निष्क्रिय है