Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 119, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
नानेव सर्गो नानायं ज्ञस्यैकात्मशिवात्मकः ।
पुंस्त्वकर्मक्रिया सेना मृन्मयी शिल्पिनां यथा ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे शिल्पियों की मिट्टी की बनी हुई पुरुषाकार सेना युद्धादि पुरुषार्थ करनेवाली सी
प्रतीत होती है