Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 119, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
आदर्शनगराकारे मृगतृष्णाम्बुभास्वरे ।
द्विचन्द्रविभ्रमाभासे सर्गेऽस्मिन्कैव सत्यता ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सृष्टि दर्पण में
प्रतिबिम्बित नगर के तुल्य हे ओर मृगतृष्णा के जल के समान प्रकाशमान है तथा दो चन्द्रमाओं
के भ्रम के सदश प्रतीत होती है, इसलिए इस सृष्टि में कौन-सी सत्यता है