Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 12, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
चिदेवंपरिवारा सा जीवशब्देन कथ्यते ।
भाविशब्दार्थजालेन बीजं रूपौघशाखिनः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार वायुपर्यन्त जिसका परिवार है, ऐसी वह चिति जीवशब्द
से कही जाती है । वही भावी नाम-रूपसमूह से मूर्तिमान् जीवों के समूहरूपी वृक्ष की बीज
है अर्थात् सम्पूर्ण मूर्त्याकार पदार्थ (जीव) उसीसे उत्पन्न होते हैं