Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 12, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
भविष्यद्रूपसंकल्पनामासौ कल्पनात्मकः ।
संकल्पात्मगुणैर्गन्धतन्मात्रत्वं प्रपश्यति ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर पृथिवी की सृष्टि कहते हैं ।
जलभाव को प्राप्त परमात्मा “मैँ पृथिवी ही हूँ” यों संकल्परूप होने से जिसका स्वरूप
आगे होनेवाला है, उस पृथिवी का संकल्पनात्मक होकर संकल्परूप अपने गुणों से अपने को
गन्धतन्मात्रा देखता है । अर्थात् “में गन्धतन्मात्रा होऊँ” अपने इस संकल्पनात्मक गुण से
गन्धतन्मात्रा हो जाता है