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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 12, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

भाविभूगोलकत्वेन बीजमाकृतिशाखिनः । सर्वाधारात्मनस्तस्मात्संसारः प्रसरिष्यति ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

अब पृथिवी की सृष्टि का उपयोग बतलाते हैं। भावी (आगे होनेवाले) ब्रह्माण्डगोलकरूप से या ज्योतिषशास्त्र में प्रसिद्ध भूगोलरूप से वह मनुष्य आदि के विविध आकाररूप वृक्षका बीज है । सम्पूर्णं चर ओर अचर जीवों के आधारस्वरूप उक्त पृथिवी से संसार का प्रसार होता है