Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 12, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
तस्यानन्तप्रकाशात्मरूपस्यानन्तचिन्मणेः ।
सत्तामात्रात्मकं विश्वं यदजस्रं स्वभावतः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि यह सम्पूर्ण विश्व स्वभावतः सदा अनन्तप्रकाशरूप
तथा अनन्तचैतन्यस्वरूप ब्रह्म का सत्तामात्ररूप (५४५) है, इसलिए वही मानों चेत्यता को
(दृश्यताको) प्राप्त होता है, यों अग्रिम श्लोक से सम्बन्ध है