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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 120, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

हा पुत्रि गुञ्जाफलदामहारे समुन्नताभोगपयोधराङ्गि । वातोल्लसत्कज्जललोलवर्णे पर्णाम्बरे बादरजम्बुदन्ते ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

गुंजा के फलों की मालारूपी हार धारण करनेवाली, उन्नत और विशाल स्तन मण्डल से युक्त अंगवाली, वायु से उड़ रहे काजल के तुल्य चंचल वर्णवाली लता, बेर और जामुन के दानों के तुल्य दाँतवाली हे पुत्री, तुम्हारा मुझे बड़ा दुःख है