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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 120, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

हा राजपुत्रेन्दुसमानकान्त संत्यज्य शुद्धान्तविलासिनीस्ताः । रतिं प्रयातोऽसि ममात्मजायां न सापि ते सुस्थिरतामुपेता ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

हे चन्द्रमा के समान सुन्दर राजकुमार, तुम्हारे लिए मुझे बड़ा शोक है, तुमने एक से एक बढ़कर सुन्दरी उन अन्तःपुर की विलासिनी रानियों को छोड़कर मेरी (एक साधारण भीलनी की) लड़की से प्रेम किया, किन्तु दुर्भाग्यवश वह भी तुम्हारे लिए चिरस्थायिनी नहीं हुई