Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 120, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
संसारनद्याः सुतरङ्गभङ्गैः क्रियाविलासैर्विहितोपहासैः ।
किं नाम तुच्छं न कृतं नृपेशो यद्योजितः पुष्कसकन्यकायाम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
संसाररूपी नदी
के सुन्दर तरंगरूप कर्मपरिपाकोंने, जिनके लिए उपहास उचित है, क्या गर्हित फल पैदा नहीं
किया, जो कि महाराज का चण्डाल की तुच्छ कन्या से संयोग करा दिया