Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 120, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
यत्र दृष्टं मया दुःखमरण्यानीं स्मरामि ताम् ।
चित्तादर्शगतां विन्ध्यात्कदाचिल्लभ्यते हि सा ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस महावन में मैंने दुःख देखा, चित्त रूपी
दर्पण में स्थित उस महावन का मैं स्मरण करता हूँ। विन्ध्य मेँ शायद वह कहीं मुझे मिल
जाय