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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 120, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अथैकस्मिन्प्रदेशे तां चिन्तामिव पुरोगताम् । ददर्शोग्रामरण्यानीं परलोकमहीमिव ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके अनन्तर एक प्रदेश में आगे आई हुई चिन्ता के समान उस उत्कट महावन को परलोकभूमि के समान राजा ने देखा