Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
चण्डाल्युवाच ।
केनचित्त्वथ कालेन ग्रामकेऽस्मिञ्जनेश्वर ।
अवृष्टिदुःखमभवद्भीषणं भग्नमानवम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
चण्डाली ने कहा : हे राजन्, कुछ काल बीतने पर इस ग्राम में वृष्टि के न होने से
अत्यन्त भयंकर तथा मनुष्यों को नष्ट करनेवाला दुर्भिक्ष का दुःख उपस्थित हुआ
सर्ग सन्दर्भ
एक सौ बीसवाँ सर्ग समाप्त एक सौ इक्कीस सर्ग चण्डाली द्वारा उक्त वृतान्त को सुनकर विस्मित हुए राजा लवण के घर आ जाने पर वसिष्ठजी के कथन से उस वृत्तान्त का श्रीरामचन्द्रजी को विनिश्चय ।