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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

इत्येवं राघवाविद्या महती भ्रमदायिनी । असत्सत्तां नयत्याशु सच्चासत्तां नयत्यलम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार यह अविद्या बड़ी भ्रम देनेवाली है, यह अतिशीघ्र पूर्ण रीति से सत्‌ को असत्‌ तथा असत्‌ को निरा सत्‌ बना देती है