Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
कथमेवं वद ब्रह्मन्स्वप्नः सत्यत्वमागतः ।
भ्रमोदार इवैषोऽर्थो न मे गलति चेतसि ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे
ब्रह्मन्, कृपा कर यह बतलाइये कि यह स्वप्न कैसे सत्य अर्थात् जाग्रतकाल के अनुभव का
विषय हो गया ? बड़े भ्रम के समान यह बात मेरे मन में बैठती नहीं हे