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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । सर्वमेतदविद्यायां संभवत्येव राघव । घटेषु पटता दृष्टा स्वप्नसंभ्रमितादिषु ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, इन सभी बातों का अविद्या में सम्भव हे, देखिये न, स्वप्न तथा संभ्रम आदि में घट मेँ पटता दीख पड़ती है