Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
विपर्यस्तमतिर्जन्तुः पश्यत्यात्मानमेडकम् ।
बिभर्ति सिंहतामेडो वासनावशतः स्वयम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसकी मति विपरीत हो गई हे, वह प्राणी अपने को भेडा
समझता है ओर वासना से भंडा भी अपने में सिंहता को धारण करता है