Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
विषमभ्रमदाविद्यामोहाहन्तादयः समाः ।
सर्वे चित्तविपर्यासफलसंपत्तिहेतुतः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
विषम भ्रम
को देने वाले अविद्या, मोह, अहन्त्व आदि समान हैं, क्योकि ये सब चित्त के विपर्यसिरूप
फल की सम्पत्ति के हेतु है