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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

तेनेमा दुःखभागिन्यः शून्या वयमिह प्रभो । सौम्य शोचाम सद्वाष्पमाचान्तेक्षणधारया ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो, हे सुन्दर, उस दुर्भिक्ष तथा बन्धुओं के मरण से इस वन में हम अभागिनिर्यो शून्य होकर नेत्रं से अश्रुधारा बहाती हुई शोक कर रही हैं